समकालीन

भाषा के लोकतंत्र में विराम चिह्नों की तलाश / त्रिभुवन

ज्ञानेंद्रपति की कविता ‘मूर्धन्य ष’ की संवेदना से शुरू होकर त्रिभुवन का यह व्यंग्यात्मक लेख “विराम गणराज्य” की एक ऐसी…

अनुवादकिताबी

अदृश्य शहर-11 / इतालो काल्विनो / (अनु. सुमन शेखर)

युवा कथाकार सुमन शेखर ने महानतम रचनाकारों में से एक इतालो कैल्विनो की अनूठी गद्य-कृति ‘इनविजिबल सिटीज’ का अनुवाद किया…

समकालीन

सांस्थानिक हत्याओं वाले माथे का समाज / कैलाश वानखेड़े

साहिल वाकोडे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई के विद्यार्थी थे। बीते अठारह सितम्बर को उनका शव हॉस्टल के कमरे में मिला…